टॉपर्स कैसे और क्यों चुनते हैं कोटा और एलन ?

कोटा. जेईई-मेन-2021 के रिजल्ट्स में कोटा में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स ने देश में इतिहास कायम करते हुए रिजल्ट दिए हैं। यहां तैयारी कर रहे मेट्रो सिटी मुम्बई के सिद्धान्त मुखर्जी, दिल्ली की काव्या चौपड़ा, जयपुर के मृदुल अग्रवाल और बोकारो के साकेत झा ने 100 पर्सेन्टाइल के साथ-साथ 300 में से 300 अंक प्राप्त किए हैं। परिणाम के बाद एक बार फिर चर्चित सवाल स्टूडेंट्स से पूछा गया कि पढ़ाई के लिए कोटा या एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ही क्यों ?

इस सवाल के जवाब में एक नया ट्रेंड देखने को मिला। अब स्टूडेंट्स किसी के कहने मात्र से या इंटरनेट पर सर्चिंग के रिजल्ट्स आधार पर पढ़ाई के लिए शहर का चुनाव नहीं करते, वरन स्वयं की जरूरत, पढ़ाई का स्तर और श्रेष्ठता को परखने के बाद कोटा या एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट का चयन करता है। स्टूडेंट्स की अपेक्षा और पेरेन्ट्स के भरोसे पर खरा उतर रहा है कोटा। स्टूडेंट्स और पेरेन्ट्स अलग-अलग मापदण्ड तय कर कोटा को परखते हैं और खरा उतरने के बाद यहां पढ़ाई करने आते हैं, एलन में एडमिशन लेते हैं।

मुम्बई में नहीं मिले बराबर के स्टूडेंट्स

जेईई-मेन फरवरी में 300 में से 300 अंक लाने वाले सिद्धान्त मुखर्जी के पिता संदीप मुखर्जी आईआईटी कानपुर से पासआउट हैं तथा मां नबोनीता चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। दोनों मुम्बई में सेटल्ड हैं। सिद्धान्त 10वीं तक वहीं पढ़ा। इस दौरान दोनों ने मुम्बई के कई स्कूल्स और कॉलेज घूमे। वहां के स्टूडेंट्स का स्तर देखा, उसी के अनुसार फैकल्टीज की पढ़ाई को परखा। इसके बाद कोटा आए, यहां भी स्टूडेंट्स की जानकारी ली, फैकल्टीज से बातचीत की। उनके फण्डामेंटल और सिस्टम को परखा। जब सिद्धान्त को लगा कि उसके स्तर के स्टूडेंट्स और टीचर्स यहां है तो माता-पिता ने सिद्धांत की पढ़ाई कोटा में एलन में एडमिशन का निर्णय लिया। अब पूरा परिवार खुश है और अच्छे परिणाम की आगे भी अपेक्षाएं हैं।

साकेत ने हल करवाए सवाल

इसी तरह साकेत के पिता हाईस्कूल के प्रिंसिपल हैं। एक बहन एमबीबीएस और दूसरी बीटेक तथा एक अन्य कोल इंडिया में असिसटेंट मैनेजर है। साकेत की बुद्धिमत्ता को देखते हुए उसकी आगे की पढ़ाई के लिए एजुकेशन डेस्टिनेशन चुनना चुनौती थी। ऐसे में कई शहरों के फैकल्टीज को परखा गया। कोटा आया और यहां फैकल्टीज से बातचीत की। साकेत ने रीजनल मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड के फिजिक्स के कुछ सवालों में परेशानी आई थी, जिन्हें किसी अन्य शहर में फैकल्टीज ठीक से समझा नहीं पा रहे थे, जब कोटा की फैकल्टीज ने पढ़ाया तो बहुत अच्छी तरह समझ आया और इसी आधार पर साकेत ने कोटा में एलन में पढ़ने का मन बनाया। कोटा के अपने निर्णय पर वे खुश हैं।

काव्या चौपड़ा ने इसलिए चुना

दिल्ली में रहकर पढ़ाई करने वाली काव्या चौपड़ा ने भी जेईई की तैयारी के लिए कोटा और एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट चुना। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि कोटा में क्लासरूम कोचिंग का कोई मुकाबला नहीं है। यहां स्टूडेंट्स की लर्निंग अच्छी होती है और स्टूडेंट्स को आगे बढ़ने के लिए पीयर गु्रप मिलता है। दूसरी जगहों पर इतना अच्छा गु्रप नहीं मिल पाता है। मैं दिल्ली में पढ़ रही थी लेकिन फिर लगा कि कोटा जैसी फैकल्टी टीम कहीं नहीं मिल सकती। इसलिए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया।

चित्रांग ने भी परखा था कोटा

इसी तरह जेईई-एडवांस्ड 2014 के आल इंडिया टॉपर चित्रांग मूर्दिया के आईआईटीयन पिता ने भी कोटा में घूमकर फैकल्टीज से चर्चा की थी। सब्जेक्ट्स पर फैकल्टीज के कमांड देखे और स्टूडेंट के साथ बैठने वाले दूसरे स्टूडेंट्स के रिजल्ट्स देखे, जब उन्हें लगा कि कोटा में उनके बेटे चित्रांग को कम्पीटिशन मिल सकता है और उसे तैयार करने के लिए बेस्ट टीचर्स का पूल यहां हैं तो उन्होंने कोटा में तैयारी के लिए कोचिंग करवाई और चित्रांग ने आल इंडिया टॉप किया।

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