जानिए क्यों, दक्षिण भारतीय स्टूडेंट्स की पसंद बना कोटा

साल-दर-साल बढ रहा आंध्रप्रदेश व तेलंगाना के स्टूडेंट्स का आंकड़ा

 
कॅरियर सिटी कोटा का माहौल और यहां के श्रेष्ठ परिणाम पूरे देश के स्टूडेंट्स को अपनी ओर आकर्षित करते हंै। हर साल देश के कोने-कोने से लाखों स्टूडेंट्स डाॅक्टर-इंजीनियर बनने का सपना साकार करने के लिए यहां आते हैं। दक्षिण भारत में आंध्रप्रदेश व तेलंगाना जैसे राज्यों से काफी संख्या में स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षा जेईई व नीट की तैयारी करने कोटा आ रहे है। इन दोनों राज्यों के स्टूडेंट्स की कोटा में संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। यही नहीं कोटा देश के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले हर वर्ष अधिक संख्या में स्टूडेंट्स को कोचिंग दे रहा है। कोटा में स्टूडेंट्स को सिर्फ जेईई व नीट की तैयारी ही नहीं कराई जाती बल्कि उसके सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया जाता है।

क्यों है कोटा पहली पसंद

कोटा में पढ़ रहे दक्षिण राज्यों के स्टूडेंट्स के अनुसार यहां के कोचिंग संस्थानों की फीस दक्षिण राज्यों के कोचिंग संस्थानों की अपेक्षा कम है। कोटा के कोचिंग संस्थानों का प्रबंधन काफी अच्छा है। स्टूडेंट के स्तर को देखते हुए उसे तैयारी कराई जाती है। ऐसा नहीं होता कि  सिर्फ सिलेबस पूरा करा दिया। कोटा कोचिंग मे प्रत्येक टाॅपिक को प्रायोगिक तौर पर फंडामेंटल समझाते हुए बताया जाता है। स्टूडेंट्स उसे बेहतर तरीके से समझ सकें। स्टूडेंट्स ने बताया कि दक्षिण राज्यों के कोचिंग संस्थानों में प्रबंधन अच्छा नहीं है। वहां क्लासरूम स्टडी का समय बहुत ज्यादा है। वहां स्टूडेंट्स एक जेल की तरह महसूस करते हैं। इसके अलावा वीकली या मंथली टेस्ट के रिजल्ट भी सार्वजनिक कर दिए जाते है, जिससे कमजोर परफाॅर्मेन्स वाले स्टूडेंट्स को शर्मिंदा होना पड़ता है। ऐसे में कई स्टूडेंट्स अवसाद में चले जाते हैं।

बेस्ट टीचिंग मैथेडोलाॅजी

कोटा के कोचिंग संस्थानों में अनुभवी फैकल्टीज पढ़ाती है। इसमें आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपलआईटी से पासआउट इंजीनियर्स के अलावा मेडिकल काॅलेजों से एमबीबीएस करने वाले होनाहार युवा होते हैं। हर साल बदल रहे परीक्षा के पैटर्न के अनुरूप स्टूडेंट्स को परीक्षा के लिए तैयार किया जाता है। कोटा में छह घंटे की क्लासरूम स्टडी के बाद स्टूडेंट को आधे दिन का समय मिलता है। जिसमें वो सेल्फ असेसमेंट, होमवर्क व रिवीजन कर सकता है, जिससे कि डाउट्स सामने आते है। क्योंकि किसी भी टाॅपिक को तभी पूरा माना जाता है जब स्टूडेंट को उस टाॅपिक में एक भी डाउट नहीं हो। कोटा में इसके लिए क्लासरूम स्टडी के अलावा डाउट काउंटर्स की व्यवस्था भी है।

नेशनल लेवल का काॅम्पीटिशन

एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने बताया कि कोटा में देशभर के लगभग 25 राज्यों से स्टूडेंट्स पढ़ाई करने आते हैं। इसलिए यहां स्टूडेंट को नेशनल लेवल का काॅम्पिटिशन मिलता है और बेस्ट स्टूडेंट्स का पूल भी मिलता है। यहां पढाने वाली फैकल्टीज में अधिकांश खुद आईआईटीयन व एमबीबीएस होते हैं। इसे देखते हुए दक्षिण राज्यों के स्टूडेंट्स का स्झान कोटा के प्रति बढ़ रहा है। जेईई एडवांस्ड 2020 के रिजल्ट में तेलुगु राज्यों के दो स्टूडेंट्स ने टाॅप 10 में जगह बनाई। इसके पिछले वर्ष भी 3 स्टूडेंट्स ने टाॅप 10 में स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार नीट 2020 के रिजल्ट में तेलुगु राज्यों के 15 एवं नीट 2019 में 4 स्टूडेंट्स टाॅप 50 में स्थान प्राप्त कर चुके हैं। वहीं कोटा की सक्सेस रेट इससे ज्यादा है। यहां न केवल अधिक संख्या में स्टूडेंट्स काउंसलिंग के लिए क्वालीफाई होते हैं, वरन टाॅपर्स काउंट में भी कोटा के स्टूडेंट्स अधिक रहते हैं और आल इंडिया टाॅपर्स में हर साल कोटा से स्टूडेंट रहते हैं।

Leave comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *.