स्टूडेंट फिट्जी का लेकिन दावा न्यूक्लियस का
बोर्ड परीक्षाओं सहित जेईई एडवांस, नीट व एम्स परीक्षाओं के परिणाम आ चुके है। जो स्टूडेंट्स भविष्य में डाॅक्टर-इंजीनियर बनना चाहते हैं, वे अपने लिए किसी अच्छे कोचिंग संस्थान की तलाश कर रहे हैं। कोचिंग संस्थानों पर जाकर, अखबार में आ रहे विज्ञापनों से एवं ऑनलाइन उनके बारे में जानकारियां जुटाई जा रही है, लेकिन स्टूडेंट्स असमंजस की स्थिति में है। आखिर वो कैसे अपने लिए श्रेष्ठ कोचिंग संस्थान का चयन करे। क्योंकि हर कोचिंग संस्थान टाॅपर स्टूडेंट्स को अपना बताताहै। यदि कोई स्टूडेंट्स किसी कोचिंग संस्थान पर मात्र एक दिन भी पढ़ा और उसकी नीट, एम्स या जेईई एडवांस्ड में रैंक आ गई तो वो कोचिंग संस्थान उसकी रैंक का क्रेडिट खुद ले रहा है। प्रतिस्पद्र्धा के दौर में स्टूडेंट्स को भ्रमित करने का पूरा इंतजाम कोचिंग संस्थानों ने किया है। ऐसे में कोचिंग प्रोग्राम भी विभिन्न तरह के हो चुके हैं। स्टूडेंट्स व पेरेन्ट्स ध्यान रखें सिर्फ उसी कोचिंग संस्थान का दावा सही होता है, जिसके यहां से स्टूडेंट ने रेगुलर क्लासरूम प्रोग्राम में जाकर पढ़ाई की हो।
पहला प्रोग्रामः रेगुलर क्लासरूम प्रोग्राम- जिसमें स्टूडेंट्स को तीन विषय साल भर कोचिंग संस्थान में पढ़ाए जाते हैं। इस तरह के प्रोग्राम एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट, रेजोनेंस व फिट्जी आदि संचालित करते हैं।
दूसरा प्रोग्रामः हर सब्जेक्ट को अलग-अलग पढने की सुविधा। इस तरह का प्रोग्राम कॅरियर पाॅइंट संस्थान ने संचालित किया हुआ। हाल ही में संस्थान से इस प्रोग्राम को लाॅन्च किया और संस्थान का नाम रख दिया कॅरियर पाॅइंट वर्जन 2.0
तीसरा प्रोग्रामः एसडीसीसीपी- शोर्ट ड्यूरेशन क्लासरूम प्रोग्राम। कल जारी हुए जेईई एडवांस्ड के रिजल्ट के बाद इस तरह का कोर्स कोटा के न्यूक्लियस कोचिंग संस्थान की ओर से अखबारों में जारी विज्ञापन में देखने को मिला। यानी फैकल्टी ने स्टूडेंट को घर जाकर पढ़ाया। न्यूक्लियस के विज्ञापन में जेईई एडवांस्ड 2019 के रिजल्ट में आॅल इंडिया सैकण्ड रैंक प्राप्त स्टूडेंट को खुद का एसडीसीपी प्रोग्राम से होने का दावा किया जा रहा है। जबकि स्टूडेंट फिट्जी कोचिंग संस्थान में पढ़ा हुआ है। अब ये कैसे संभव हुआ कि कोटा न्यूक्लियस कोचिंग संस्थान की फैकल्टी उसे पढाने दिल्ली गई। न्यूक्लियस कोचिंग संस्थान को कोटा में खुले दो साल हुए हैं।

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