20 नंबर के इंटरनल असेसमेंट के आधार पर सीबीएसई तय कर सकता है रैंक

 

सीबीएसई ने घोषणा की थी कि दसवीं के छात्रों को 11वीं कक्षा में प्रमोट किया जाएगा। अब दसवीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन की योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए सीबीएसई ने देश के प्रमुख स्कूलों से ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह की सभी परीक्षाओं की संख्या व उनमें इस्तेमाल किए गए मूल्यांकन के तरीकों की विस्तृत जानकारी मांगी है। इनके आधार पर सीबीएसई दसवीं के छात्रों के नतीजे घोषित करेगा। स्कूलों ने मांग यह भी रखी है कि कोई टॉपर्स घोषित नहीं होने चाहिए। सीबीएसई ने इन स्कूलों से पूछा है कि स्कूल ने पूरे साल कितने इम्तिहान कराए हैं। उनमें से कितने ऑनलाइन थे, कितने ऑफलाइन थे और उनका मूल्यांकन करने के लिए क्या तरीके इस्तेमाल किए गए थे। कुछ स्कूलों ने यह भी सुझाव दिए हैं कि सीसीई के तहत स्कूलों के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर छात्रों को प्रमोट कर दिया जाए। सीबीएसई को छात्रों की ग्रेडिंग करने, उन्हें रैंक देने और टॉपर्स घोषित करने से बचना चाहिए, क्योंकि-ऐसा करना महज अटकलबाजी होगी, चूंकि परीक्षाएं वास्तव में संचालित नहीं कराई जा सकीं।

15 बिंदुओं पर मांगी गई है जानकारी

स्कूलों को एक तय फार्मेट में बच्चों की पूरे वर्ष की परफार्मेंस रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसमें प्रोजेक्ट वर्क, असाइनमेंट आदि की जानकारी मांगी गई है। स्कूल इसी के आधार पर रिजल्ट तैयार करेंगे। स्कूलों से 15 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। साप्ताहिक टेस्ट के साथ टर्म परीक्षा में शामिल छात्रों की जानकारी के साथ उसमें मिले अंकों का विवरण मांगा गया है। छात्रों के प्रोजेक्ट, असाइनमेंट आदि पूरे करने के साथ बच्चों के इंटरनल असेसमेंट भी किए गए।

यह फॉर्मूला लागू हो सकता है

स्कूलों को इंटरनल असेसमेंट के मार्क्स सीबीएसई को भेजने होंगे और पीरियॉडिकल टेस्ट व मिड टर्म एग्जाम के आधार पर रिजल्ट डिक्लेयर किया जाएगा। मार्क्स के आधार पर मेरिट तैयार होगी और उसी के हिसाब से स्ट्रीम चुननी होगी। सूत्र बताते हैं कि स्कूल को हर स्टूडेंट की 20 नंबर की असेस्मेंट भेजनी होगी। 20 में से जितने नंबर स्कूल द्वारा भेजे जाएंगे, उन्हें फाइनल मार्क्स में जोड़ दिया जाएगा। बाकी 80 नंबरों में से स्टूडेंट्स को कितने नंबर देने हैं, ये भी स्कूल अपने लेवल पर तय करेंगे। ये नंबर बच्चों को मिड टर्म के एग्जाम और साल भर हुए पीरियॉडिकल टेस्ट के आधार पर दिए जाएंगे।

रिजल्ट को चैलेंज कर सकेंगे स्टूडेंट

अगर कोई स्टूडेंट सीबीएसई के रिजल्ट से संतुष्ट नहीं है तो वह इसे चैलेंज कर सकता है। उस स्टूडेंट को सीबीएसई के पास ही रिजल्ट को चैलेंज करना होगा। अगर स्टूडेंट के चैलेंज के पीछे वाजिब कारण हैं तो सीबीएसई उसका ऑफलाइन एग्जाम करवाएगी।

20 नंबर के इंटरनल असेसमेंट के आधार पर सीबीएसई तय कर सकता है रैंक

सीबीएसई ने घोषणा की थी कि दसवीं के छात्रों को 11वीं कक्षा में प्रमोट किया जाएगा। अब दसवीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन की योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए सीबीएसई ने देश के प्रमुख स्कूलों से ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह की सभी परीक्षाओं की संख्या व उनमें इस्तेमाल किए गए मूल्यांकन के तरीकों की विस्तृत जानकारी मांगी है। इनके आधार पर सीबीएसई दसवीं के छात्रों के नतीजे घोषित करेगा। स्कूलों ने मांग यह भी रखी है कि कोई टॉपर्स घोषित नहीं होने चाहिए। सीबीएसई ने इन स्कूलों से पूछा है कि स्कूल ने पूरे साल कितने इम्तिहान कराए हैं। उनमें से कितने ऑनलाइन थे, कितने ऑफलाइन थे और उनका मूल्यांकन करने के लिए क्या तरीके इस्तेमाल किए गए थे। कुछ स्कूलों ने यह भी सुझाव दिए हैं कि सीसीई के तहत स्कूलों के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर छात्रों को प्रमोट कर दिया जाए। सीबीएसई को छात्रों की ग्रेडिंग करने, उन्हें रैंक देने और टॉपर्स घोषित करने से बचना चाहिए, क्योंकि-ऐसा करना महज अटकलबाजी होगी, चूंकि परीक्षाएं वास्तव में संचालित नहीं कराई जा सकीं।

15 बिंदुओं पर मांगी गई है जानकारी

स्कूलों को एक तय फार्मेट में बच्चों की पूरे वर्ष की परफार्मेंस रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसमें प्रोजेक्ट वर्क, असाइनमेंट आदि की जानकारी मांगी गई है। स्कूल इसी के आधार पर रिजल्ट तैयार करेंगे। स्कूलों से 15 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। साप्ताहिक टेस्ट के साथ टर्म परीक्षा में शामिल छात्रों की जानकारी के साथ उसमें मिले अंकों का विवरण मांगा गया है। छात्रों के प्रोजेक्ट, असाइनमेंट आदि पूरे करने के साथ बच्चों के इंटरनल असेसमेंट भी किए गए।

यह फॉर्मूला लागू हो सकता है

स्कूलों को इंटरनल असेसमेंट के मार्क्स सीबीएसई को भेजने होंगे और पीरियॉडिकल टेस्ट व मिड टर्म एग्जाम के आधार पर रिजल्ट डिक्लेयर किया जाएगा। मार्क्स के आधार पर मेरिट तैयार होगी और उसी के हिसाब से स्ट्रीम चुननी होगी। सूत्र बताते हैं कि स्कूल को हर स्टूडेंट की 20 नंबर की असेस्मेंट भेजनी होगी। 20 में से जितने नंबर स्कूल द्वारा भेजे जाएंगे, उन्हें फाइनल मार्क्स में जोड़ दिया जाएगा। बाकी 80 नंबरों में से स्टूडेंट्स को कितने नंबर देने हैं, ये भी स्कूल अपने लेवल पर तय करेंगे। ये नंबर बच्चों को मिड टर्म के एग्जाम और साल भर हुए पीरियॉडिकल टेस्ट के आधार पर दिए जाएंगे।

रिजल्ट को चैलेंज कर सकेंगे स्टूडेंट

अगर कोई स्टूडेंट सीबीएसई के रिजल्ट से संतुष्ट नहीं है तो वह इसे चैलेंज कर सकता है। उस स्टूडेंट को सीबीएसई के पास ही रिजल्ट को चैलेंज करना होगा। अगर स्टूडेंट के चैलेंज के पीछे वाजिब कारण हैं तो सीबीएसई उसका ऑफलाइन एग्जाम करवाएगी।

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