बुनकर के बेटे ने किया ऐसा काम कि पिता की छाती गर्व से चौड़ी हो गई…

राजस्थान के बाड़मेर जिले का छोटा सा मेहरानगढ गांव। मात्र 40 से 50 घरों की बस्ती। दूर-दूर तक कोई सुख-सुविधा नहीं। रेतीला इलाका होने के कारण पानी की कमी। यदि ठीक-ठाक बारिश हो गई तो खाने लायक अनाज पैदा हो पाता है। ऐसी परिस्थितियों में पढना तो दूर जीवन यापन करना भी एक चुनौती होता है। इस गांव के युवाओं ने नीट व जेईई जैसी परीक्षाओं के नाम तक नहीं सुने लेकिन, यहां के मनोहरलाल में आगे बढने और जीवन में कुछ कर गुजरने की ललक थी। इसलिए वह पिछले वर्ष कोटा आया और कड़ी मेहनत कर मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी की। हाल ही में जारी नीट 2019 के परीक्षा परिणाम में उसने शानदार सफलता प्राप्त करते हुए 512 अंक प्राप्त किए। आॅल इंडिया रैंक 42365 एवं एससी कैटेगरी रैंक 1095 रही है। मनोहरलाल अब अपने गांव का पहला युवा होगा जोकि डाॅक्टर बनने जा रहा है।

पिता पेशे से बुनकर
चार भाई-बहनों में सबसे छोटे मनोहरलाल के पिता नरसिंगा राम पेशे से बनुकर है। कुछ जमीन है लेकिन पानी के अभाव में अधिकांश समय सूखी पड़ी रहती है। दोनों बहनों की शादी हो चुकी है एवं बड़ा भाई कांस्टेबल भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा है। पिता का काम दुकानों से मिलने वाले आॅर्डर पर निर्भर करता है। यदि आॅर्डर मिल जाएं तो महीने के 10 से 12 हजार रूपए कमा पाते हैं। कई बार तीन-चार महीनों तक आॅर्डर नहीं मिलते तो काम ठप पड़ जाता है। मां दुर्गा देवी गृहिणी हैं।

मनोहरलाल को नहीं पता था नीट के बारे में
शुरू से पढ़ाई में होनहार मनोहरलाल ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा 81 प्रतिशत एवं 10वीं कक्षा 83 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है। 10वीं कक्षा में अपने गांव से छह किलोमीटर दूर स्थित स्कूल पढ़ने जाता था। क्षेत्र के युवाओं में जागरूकता का अभाव है। इसलिए उसे नहीं पता था कि एमबीबीएस में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा देनी होती है। 11वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मनोहरलाल के बड़े भाई ने उसे बताया कि कोटा के एक कोचिंग संस्थान की ओर से प्रतिभावान विद्यार्थियों को आगे लाने के उद्देश्य से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा रही है। मनोहरलाल ने परीक्षा में भाग लिया और उसका चयन कोचिंग की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही नीट परीक्षा की कोचिंग के लिए हो गया। तब जाकर मनोहरलाल को पता चला कि नीट के जरिए एमबीबीएस में प्रवेश मिलता है। उसने साल भर कोटा में रहकर पढ़ाई की। इस दौरान उसके रहने-खाने की निशुल्क व्यवस्था भी कोचिंग संस्थान की ओर से की गई।

पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा
जैसे ही मनोहरलाल के पिता को पता चला कि बेटे का नीट में चयन हो गया है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनका कहना था कि बेटा डाॅक्टर बन जाएगा तो अब घर की स्थिति सुधर जाएगी।

प्रेरणाः परिस्थितियां कितनी ही विपरीत क्यों न हों, यदि व्यक्ति में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो वो सफलता प्राप्त कर ही लेता है।

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