रेजोनेंस से अलग हुआ रिलायबल
  • कोटा के प्रमुख कोचिंग संस्थान रेजोनेंस की करीब 100 फैकल्टीज ने प्रारंभ किया ‘रिलायबल इंस्टीट्यूट’, पहले दिन 6 हजार स्टूडेंटृस ने कराया रजिस्ट्रेशन
  • रेजोनेंस के प्रमुख एचओडी के जाने से संस्थान बुरी तरह टूटा, संस्थान के पास फैकल्टीज को देने के लिए नहीं था पैसा, पिछले दिनों कई फैकल्टीज को रेजोनेंस से निकाला गया

कोटा. कोचिंग सिटी कोटा के लिए शनिवार की शुरुआत धमाके भरी खबर से हुई। सुबह जब लोगों ने अखबारों के पन्ने पलटने शुरु किया तो पता चला कि कोटा का प्रमुख कोचिंग संस्थान रेजोनेंस पूरी तरह क्रश हो चुका है। क्योंकि संस्थान के प्रमुख एचओडी सहित करीब 100 फैकल्टीज ने संस्थान से अलग होकर रिलायबल कोचिंग की स्थापना कर दी है। अकादमिक टीम किसी भी कोचिंग संस्थान की रीढ होती है। ऐसे में रेजोनेंस की फैकल्टीज के जाने के बाद संस्थान की टैगलाइन ‘रेजोनेंस ही रिलायबल है’ सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि फैकल्टीज के जाने के बाद संस्थान के कई विद्यार्थी भी रिलायबल कोचिंग में चले गए हैं। एक साथ इतनी संख्या में तीनों विभागों के एचओडी सहित फैकल्टीज के छोड़कर जाना कोटा कोचिंग के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव है। इस बड़े बदलाव के बाद रेजोनेंस में अफरा-तफरी का माहौल है। भविष्य में संस्थान की अन्य फैकल्टीज भी अन्य कोचिंग इंस्टीट्यूट में मौकों की तलाश कर रही है।

खुद पर भारी पड़ा नवाचार
आईआईटीयन आरके वर्मा ने 11 अप्रैल 2001 को रेजोनेंस की नींव रखी थी। कुछ वर्षों बाद ही संस्थान कमजोर प्रबंधन का शिकार होना शुरु हो गया था। संस्थान ने कंपनी को संचालित करने के लिए अन्य प्राइवेट कंपनियों से लोन तक लिया था लेकिन फिर भी संस्थान कोचिंग इंडस्ट्री में खुद को मजबूती से स्थापित नहीं कर सका। पिछले दिनों संस्थान की बागडोर केकेआर कंपनी के हाथों में आई। संस्थान में नए सीईओ संजय पुरोहित को नियुक्त किया गया। जिन्होने संस्थान की स्थिति सुधारने एवं विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बजाय कई प्रमुख फैकल्टीज एवं कर्मचारियों को घर का रास्ता दिखा दिया।

रेजोनेंस में सुरक्षित नहीं था भविष्य
संस्थान से अलग हुई फैकल्टीज में कई ऐसे थे जोकि रेजोनेंस की स्थापना से उसके साथ जुड़े हुए थे लेकिन, पिछले दिनों हुए बदलाव के बाद सभी फैकल्टीज एवं कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना थी। यहां तक कि संस्थान के संस्थापक निदेशक आरके वर्मा को भी डयरेक्टर पद से हटाकर मात्र फैकल्टी बना दिया गया है। पिछले दो महीनों में काफी फैकल्टीज को संस्थान से निकाला जा चुका है। भविष्य पर मंडरा रहे खतरे को भांपते हुए संस्थान की रिलायबल फैकल्टीज ने अलग ही संस्थान की स्थापना करना उचित समझा। कंपनी की जिम्मेदारी केकेआर कंपनी के पास थी। जिसका उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना था।

इन फैकल्टीज ने शुरु किया रिलायबल
रेजोनेंस में मैथ के एचओडी आयुष गोयल, कैमिस्ट्री के एचओडी चंदीप सिंघल एवं फिजिक्स के एचओडी चंद्र शेखर शर्मा सहित मैथ, कैमिस्ट्री एवं फिजिक्स की फैकल्टीज ने संस्थान से अलग होकर रिलायबल इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। इनके अलावा संस्थान की पीसीसीपी टीम भी रेजोनेंस छोड़कर रिलायबल ज्वाइन कर चुकी है। इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया में रोड नंबर एक स्थित बंसल टाॅवर में रिलायबल इंस्टीट्यूट संचालित होगा। पहले ही दिन करीब 6 हजार विद्यार्थियों ने इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।

फाइनेंस कंपनियों के भरोसे
देश में ऐसे कई कोचिंग संस्थान है जिन्होने फाइनेंस कंपनियों से मदद ली और बाद में धराशाही हो गए। क्योंकि फाइनेंस कंपनियां सिर्फ मुनाफा कमाने तक सिमित रहती है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की कोई ठोस रणनीति इनके पास नहीं रहती।

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