तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करुं…

किसी भी संस्थान का प्रमाणिक रिजल्ट उसे रिलायबल बनाता है, होर्डिंग नहीं
एनटीए की ओर से जेईई मेन जनवरी 2020 (JEE Main January 2020) का रिजल्ट आ चुका है। प्रत्येक संस्थान अपने स्टूडेंट्स के स्टेट टाॅपर होने, 99 पर्सेन्टाइल से ऊपर स्कोर हासिल करने के दावे कर समाचार पत्रों व सोशल मीडिया पर विज्ञापन जारी कर रहा है। कुल मिलाकर नए सेशन की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों व अभिभावकों को भ्रमित करने का प्रयास जारी है। जेईई मेन का रिजल्ट हो या एडवांस्ड का या फिर नीट का, कॅरियर सिटी कोटा के रिजल्ट पर पूरे देश की निगाह रहती है। ऐसे में प्रमुख कोचिंग संस्थान रेजोनेंस द्वारा पूरे शहर में होर्डिंग लगाकर रेजोनेंस ही रिलायबल है का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। संस्थान की ओर से सोशल मीडिया पर जारी एक जानकारी के अनुसार कोटा के प्रमुख कोचिंग संस्थान एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के जेईई मेन टाॅपर एवं 100 पर्सेन्टाइल स्कोर प्राप्त स्टूडेंट पार्थ द्विवेदी की सफलता पर दो कोचिंग संस्थानों द्वारा क्लेम करने की बात कही गई है। जबकि सत्यता यह है कि पार्थ द्विवेदी एलन का रेगुलर क्लासरुम स्टूडेंट और आकाश कोचिंग का डिस्टेंस प्रोग्राम का स्टूडेंट है। जिसकी प्रामाणिकता का आधार दोनों कोचिंग संस्थानों की ओर से जारी विज्ञापन एवं सोशल मीडिया अपडेट्स हैं।

किस आधार पर रिलायबल
रेजोनेंस कोचिंग द्वारा जहां खुद को रेजोनेंस ही रिलायबल है का प्रचार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर संस्थान खुद अपनी प्रामाणिकता को साबित नहीं कर पा रहा है। संस्थान की वेबसाइट पर वर्ष 2019 का जेईई मेन रिजल्ट ग्राफ में दिया गया है। जिसका कोई आधार नहीं है। वहीं वर्ष 2020 का रिजल्ट अभी तक अपडेट नहीं है। संस्थान खुद बैंगलुरु स्थित बेस कोचिंग संस्थान के दम पर अपने दिन काट रहा है। हाल ही में संस्थान के प्रशासनिक ढ़ांचे में बड़ा बदलाव हुआ है। संस्थान के कई वरिष्ठ सदस्य अन्य जगहों पर जा चुके है। संस्थान का सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म भी कट-कापी-पेस्ट के आधार पर चल रहा है। अन्य संस्थानों के सफल प्लेटफाॅर्म का उपयोग रेजोनेंस खुद की लोकप्रियता भुनाने में कर रहा है। ऐसे में संस्थान की टैगलाइन रेजोनेंस ही रिलायबल है, सवालों के घेरे में है।

तीन साल से एक ही स्टूडेंट टाॅपर
रेजोनेंस संस्थान एक ओर खुद के रिलायबल होने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर से खुद के विद्यार्थी कल्पित बीरवाल को पिछले तीन साल से टाॅपर होने का ढ़ोल पीट रहा है। संस्थान का खुद की कोई खास उपलब्धि नहीं है, इसलिए एक ही विद्यार्थी के आधार पर अन्य स्टूडेंटृस को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्थ द्विवेदी पर दावा करने वाले संस्थानों से इस बारे में बात की गई तो उन्होने सिर्फ इतना ही कहा कि तुझे मिर्ची लगी तो मैं क्या करुं.

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